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योगेश नावाची रास कोणती

योगेश नावाची रास कोणती, इंस्पेक्टर दत्ता हमेशा की तरह व्यस्त मिला और केस के बारे में पूछने पर इतना ही बताया की अपराधी को जल्द पकड़ लिया जाएगा. अब जब भाभी को तसल्ली हो गई कि मेरा जल्दी छूटने वाला नहीं है तो वो काफी रिलैक्स हो कर चुदाई का मज़ा लेने लगी और वो अब हल्के हल्के से नीचे से मेरे धक्कों का जवाब भी देने लगी.

मा बस अब थोड़ी अपनी ही बातों से फस गई. वह समझ नहीं पा रही है की क्या रिप्लाई करे. लेकिन फिर भी लिख के भेजी ये बातें चल ही रही थी कि एक बड़ी ही सुंदर जिस्म वाली सांवली सी लड़की ने आकर भाभी से पूछा- भाभी, क्या खाना लगा दूँ टेबल पर?भाभी बोली- हाँ लगा दे लाजो, और रति तुम जल्दी से हाथ मुंह धोकर खाने के लिए आ जाओ.

सबसे पहले मैंने अपने तीन कपड़े उतार दिए और उसके बाद नैना ने उतारे और पारो सब से आखिर में उतार पाई. उन दोनों की चूतों पर उगी हुई काली झांटें ख़ास चमक रही थी और दोनों ने शरीर पर हल्का सा सेंट लगा रहा था जिसकी खुश्बू अलग अलग थी. योगेश नावाची रास कोणती नैना मेरी मर्ज़ी जान गई थी, बोली- ठीक है मैं उन दोनों का इंतज़ाम कर दूंगी और मौसा मौसी को भी संभाल लूंगी.मैं बोला- नैना रानी, तुम वाकयी में हीरा हो मेरे दिल में बसे प्यार का ज़खीरा हो.रात को पारो ने खाना इस कदर लज़ीज़ बनाया कि सबने बड़ी तारीफ की ख़ास तौर से मौसा जी ने!

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  1. मैंने भी एक भेद भरी नज़र उषा मैडम पर डाली और बोला- सुधा, तुम अकेली ही नहीं हो, इसके शिकार कई और भी बन चुके हैं इस के थप्पड़ों के और इकी प्यार की थपकी के.उषा मैडम ने अपनी नज़र नीचे झुका ली लेकिन उनके लबों पर भी एक हलकी सी मुस्कान थी.
  2. मैंने उसके लंड को अपनी चूत के मुंह पर रख दिया और तब राजू ने एक ज़ोर से धका मारा और फच से लंड मेरी चूत के अंदर चला गया.बड़े अरसे के बाद मेरी गर्म और नर्म चूत को एक लंड नसीब हुआ था, मैं उस लंड का पूरा पूरा आनन्द उठाना चाहती थी. मराठी ऑंटी सेक्स विडिओ
  3. मैंने मैडम से पूछा- क्या लोगी मैडम, ठंडा या फिर गर्म?मैडम बोली- एक कप गर्म कॉफी का मिल जाए तो मज़ा ही आ जाए! अब मैंने पोजीशन बदल दी, उनको उठाया और अपनी गोदी में ले लिया और उसकी उभरी हुई चूत में मोटा लंड डाल दिया.वो भी मुझ से पूरी तरह से चिपक गई.
  4. योगेश नावाची रास कोणती...मैं समझ गया कि दोनों ग्रुप आपस में मिले हुए थे.मैं सीधे ही निम्मी और मैरी के टेबल पर बैठ गया और उनको आहिस्ता से कहा- मुझको यह उम्मीद नहीं थी कि तुम और शानू मिले हुए हो एक दूसरे से! रात को मुझको उन दोनों ने भी पकड़ लिया और मुझको चोदा.मैं बहुत रुआंसा मुंह बना कर बैठा था.. फटी हुई चूत से कुंवारी चूत काफी भिन्न होती है यह मैंने उस दिन देखा. चूत में कोई भी खरोंच या दाग नहीं दिखा और पूरा खोलने पर उसका रंग एकदम गुलाबी दिखा जबकि फटी चूत थोड़ी लाली लिए होती है.
  5. मैं निप्पल को चूमने लगता हु . कुछ देर चूमने के बाद मैने अपना चेहरा हटाकर निप्पल को देखा और फिर से अपना चेहरा स्तनों पर झुका दिया . इस बार मैने जिव्हा बाहर निकालकर माँ के निप्पल को चाटना शुरू किया . उस आदमी ने गहरी सांस लेता हुआ सिगार का एक लम्बा कश लगाया और धुएँ के बादल छोड़ता हुआ मेरी ओर रहस्यमयी मुस्कान देता हुआ देखता रहा कुछ क्षण ..

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फिर मैं एकदम रुक गया और उसके मुम्मों के साथ खेलने और उसकी मोटी लेकिन फैली हुई गांड पर हाथ फेरने लगा और तभी लाजो भी मेरे पीछे बैठ कर मेरे अंडकोष को चूसने लगी जिससे मुझको बेहद मज़ा आ रहा था.अब मुझ से रहा नहीं गया और मैंने भाभी को सीधा लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ कर ज़ोरदार चुदाई शुरू कर दी.

क्यूँ की सोने के टाइम मेरी जो आदत थी, वह आज कल नहीं हो पा रही है, इस लिए तो आज कल नीद नहीं अति ठीक से फिर नैना रति को साथ लेकर बिस्तर पर लेट गई और मैं नैना के साथ लेट गया.नैना की चूत पर हाथ लगाया तो वो एकदम गीली हो चुकी थी और अब मैंने रति के हाथ को नैना की चूत पर रख दिया और उसको नैना की गीली चूत का अहसास करवाया.

योगेश नावाची रास कोणती,कुल मिला कर बड़ा ही मन मोहक और लंड दोहक दृश्य था. मोटे और गोल मुम्मे और गोल उभरे हुए चूतड़ों की तो भरमार थी जिधर देखो उधर ही वो दिख रहे थे.दो चार लड़कियाँ कुछ अधिक कामातुर हो चुकी थी, वो आपस में खूब छेड़छाड़ और पकड़म पकड़ाई में लीन थी.

मैं माँ को एक सरप्राइज देणे के लिए धीरे से अलमारी के पास गया और लाकर खोल के मेरा उनके लिए ख़रीदा हुआ नेकलेस निकल के अलमारी बंद किया.

यानि की जाने अनजाने में इंस्पेक्टर दत्ता के हावभाव कई बार ठीक वैसे ही होते हैं जैसे की इंस्पेक्टर विनय का हुआ करता था. कुर्सी पर बैठने का अंदाज़, अँगुलियों से टेबल को बजाने का स्टाइल, सिगरेट या चाय लेने का तरीका.. सब.. सब कुछ लगभग विनय के तरीकों जैसे ही हैं.जाने क्यों लोग मोहब्बत किया करते हैं रिंगटोन

उसको लिटा दिया और उसकी टांगों में बैठ कर धीरे से लंड उसकी टाइट चूत में डाल दिया. उसकी चूत एकदम गीली और पूरी तरह से तप रही थी.मैं उसके मम्मों को चूसने लगा और हल्के हल्के धक्के भी मारता रहा, वो भी नीचे से धक्के मार रही थी. नैना पास में खड़ी होकर सुमी के मम्मों का चूषण और मर्दन कर रही थी और साथ ही हाथ से उसकी भग को भी सहला रही थी.इस दोहरे हमले सुमी ज़्यादा देर सहन नहीं कर सकी और 5-6 मिन्ट में ही उसका छूट गया.

फिर मैं ने एक जोरदार झटका मारा,वो झटका जिसे कोई पत्नी अपनी ज़िंदगी भर भूल नही सकती झटका मार कर पेनिस माँ की योनि में अपना रास्ता बनाता हुआ पांच इंच तक अंदर चला गया.

अब तक पहली वाली ने अपना ब्लाउज उतार दिया था, उसके मोटे मुम्मे एकदम आज़ाद हो गए थे और हवा में उछल रहे थे.अब उसने अपने पेटिकोट को भी उतार दिया और उसकी चूत सिर्फ बालों से ढकी रह गई लेकिन उसने जल्दी ही अपने शरीर के चारों तरफ एक सफ़ेद धोती को लपेट लिया और अपनी नग्नता को छुपाने की नाकाम कोशिश करने लगी.,योगेश नावाची रास कोणती मुझे देखते ही मम्मी ने आगे बड़ कर मेरे को उन सबसे मिलवाया.मम्मी ने बताया कि वो बुजुर्ग मेरे दूर के ताऊ थे और उनके साथ उनकी पत्नी और उनकी दो बेटियाँ थी जो लखनऊ में ही पढ़ रहीं थी. ताऊजी भी लखनऊ में रहते थे.

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